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श्रीमती मार्ग्रेट आल्वा, महामहिम राज्यपाल, उत्तराखण्ड का संक्षिप्त जीवन- वृत्त
| नाम | श्रीमती मार्ग्रेट आल्वा |
| पिता का नाम | स्व0 श्री पी0ए0नज़ारथ |
| माता का नाम | श्रीमती ई0एल0नज़ारथ |
| जन्म तिथि | 14 अप्रैल 1942 |
| जन्म स्थान | मंगलौर, जिला दक्षिण कनारा (कर्नाटक) |
| वैवाहिक स्थिति | विवाहित |
| शादी की तिथि | 24 मई 1964 |
| पति का नाम | श्री निरंजन आल्वा |
| पुत्र | 3 |
| पुत्री | 1 |
| शैक्षिक योग्यता | बी0ए0, बी0एल0, मानद डाक्टरेट की शिक्षा- माउण्ट कारमेल कालेज और गवर्मेण्ट ला कालेज, बंगलुरू (पूर्व बंगलौर) से प्राप्त की। |
| व्यवसाय | अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ती, श्रमिकसंघी (ट्रेड यूनियनिस्ट) |
| स्थाई पता | 5/15 मिल्टन स्ट्रीट, बंगलुरू (कर्नाटक) |
| वर्तमान पता | राजभवन, उत्तराखण्ड, देहरादून - 248003, दूरभाष (0135) 2757403,2757400 |
सन् 1999 में लोकसभा सदस्य के रूप में चुने जाने के पूर्व श्रीमती आल्वा 1974 से लगातार चार बार राज्य सभा की सदस्य (प्रत्येक बार 6 साल के कार्यकाल के लिए) रही।
सन् 1984 में राजीव गांधी मंत्रिमण्डल में संसदीय कार्य राज्य मंत्री के रूप में पदासीन हुई और तदुपरान्त मानव संसाधन मंत्रालय में युवा कार्य, खेल, महिला एवं बाल कल्याण विभाग का कार्यभार राज्यमंत्री के रूप में संभाला। 1991 में केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में कार्मिक, पेंशन, लोक शिकायत और प्रशासनिक सुधार मंत्रालय (प्रधानमंत्री से सम्बद्ध) में राज्यमंत्री रहीं। इस पद पर रहते हुए उन्होंने अभिशासन को जन साधारण तक ले जाने के उद्देश्य से प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण की प्रक्रिया प्रारम्भ की। उन्होंने संक्षिप्त अवधि के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री के रूप में भी कार्य किया।
श्रीमती माग्रेट आल्वा ने भारतीय संसद में अपने तीस वर्षो दौरान एक प्रतिष्ठत सांसद के रूप में कई महत्वपूर्ण संसदीय समितियों में अपना अमूल्य योगदान दिया। कुछ के नाम हैं - सार्वजनिक उपक्रम समिति, लोक लेखा समिति, विदेशी मामले, पर्यटन एवं परिवहन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा वन एवं पर्यावरण की स्टैडिंग समिति (Standing Committee on Foreign Affairs, Tourism and Transport, Science and Technology and Environment & Forest ) और महिला अधिकारों से सम्बन्धित सभी चार समितियाँ, यथा दहेज निषेध कानून (संशोधन) समिति, विवाह कानून (संशोधन) समिति, समान वेतन पुनरीक्षा समिति तथा चौरासीवां संविधान संशोधन बिल संयुक्त प्रवर समिति जो कि स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण से सम्बन्धित है। उन्होंने महिला अधिकारिता संसदीय समिति के अध्यक्ष के रूप में 1999-2004 तक सेवा की।
सन 1986 में उन्हें महिला विकास के लिए गठित प्रथम सार्क देशों के मंत्रियों की बैठक में अध्यक्ष चुना गया, तथा यूनिसेफ से प्रायोजित 'दक्षिण एशिया में बाल समस्याऐं' बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें बालिका शिशुओं की स्थिति को रेखांकित किया गया। इसकी परिणति सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्षों द्वारा वर्ष 1987 को ''बालिका वर्ष'' घोषित करने के रूप में हुई। वर्ष 1989 में महिलाओ के लिए एक परिप्रेक्ष्य योजना (Perspective Plan) की रूपरेखा बनाने के लिए सरकार द्वारा गठित समिति की अध्यक्षता की। इस योजना में महिलाओं के विकास की रणनीतिक बिन्दुओं को सम्मिलित किया गया। यह पर्सपेक्टिव प्लान कालान्तर में केन्द्रीय एवं राज्य सरकारों द्वारा महिलाओं के विकास के लिए अंगीकृत नीतियों के लिए एक ब्लूप्रिंट सिद्ध हुआ।
श्रीमती आल्वा ने महिला दशक के दौरान संयुक्त राष्ट्र के सभी प्रमुख सम्मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 1986 में WWPP (World Women Parliamentarians for Peace) की अध्यक्ष चुनी जाने के उपरान्त उन्होंने एक शिष्ट मण्डल में भाग लिया, जिसने कि वाशिंगटन में सम्पन्न एतिहासिक रीगन-गोर्बाचोफ शिखर सम्मेलन में निरस्त्रीकरण के सम्बन्ध में एक याचिका प्रस्तुत की। 1989 में संयुक्त राष्ट्र के महिला प्रभाग द्वारा विशेषज्ञ ग्रुप की बैठक की अध्यक्षता करने के लिए आमंत्रित किया गया। इस बैठक में निर्णय लेने में 'महिलाओं की भूमिका पर महिला दशक के प्रभाव' का आकलन किया गया और फिर इसी वर्ष संयुक्त राष्ट्र द्वारा संचालित ''महिलाओं के विरूद्ध हिंसा'' विषय पर सिओल (दक्षिण कोरिया) में हई ESCAP की बैठक की अध्यक्षता करने के लिए उन्हें चयनित किया गया, और 1994 में ESCAP द्वारा बैंकाक में आयोजित विशिष्ठ ब्यक्तियों की बैठक में प्रतिभाग करने के लिए आमंत्रित किया गया। 1976 और 1997 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में राष्ट्रीय शिष्टमण्डल में शामिल हुई। सोसायटी फार इण्टरनेशनल डेवलपमेन्ट की गर्वर्निंग परिषद में चुनी हुई सदस्य के रूप में तीन वर्ष तक कार्य किया। उन्होंने UNFPA के स्पेशल ऐडवाइजरी ग्रुप, जो कि काहिरा सम्मेलन के परिपेक्ष्य में जनसंख्या नीति को नई दिशा देने के लिए गठित की गई थी, में अपना योगदान किया। 1997 में कैमरून में सम्पन्न हुए राष्ट्रीय चुनाव में राष्ट्रमण्डल की प्रेक्षक की भूमिका निभाई। संयुक्त राष्ट्र द्वारा गठित आयोग में ''महिलाओं की स्थिति'' विषय पर आयोजित कान्फ्रेन्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया। बाल अधिकार पर राष्ट्रीय संहिता (Country Code) का प्रारूप बनाने के लिए UNICEF द्वारा गठित समिति में अपना योगदान दिया। उन्होंने बाल श्रम के ऊपर गठित राष्ट्रीय समिति में भी योगदान किया तथा राष्ट्रीय बाल परिषद की उपाध्यक्ष रही।
वह तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के साथ प्रतिनिधिमंडल में मारीशस, तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ प्रतिनिधिमंडल में सोवियत संघ, तत्कालीन प्रधानमंत्री पी0वी0 नरसिम्हा राव के साथ प्रतिनिधिमंडल में विश्व सामाजिक शिखर सम्मेलन, कोपेनहेगेन और और तत्कालीन उप राष्ट्रपति श्री के0आर0 नारायनन के नेतृत्व में आस्ट्रेलिया गये प्रतिनिधिमंडल की सदस्य रहीं।
मार्ग्रेट आल्वा पेशे से वकील हैं और उन्होने अपने पति, श्री निरंजन आल्वा, के साथ सुप्रीम कोर्ट में वकालत की है। उन्होंने देश विदेश की विस्तृत यात्रायें करने के अतिरिक्त हारर्वड, कोलम्बिया विश्वविद्यालयों तथा अन्य अनेक महत्वपूर्ण संस्थाओं में व्याख्यान दिए हैं।
श्रीमती आल्वा एक गैर सरकारी संगढन करूणा की संस्थापक अध्यक्षा हैं। यह संस्था महिलाओं तथा वच्चों के हितों के लिए काम करती है तथा स्थानीय निकायों में चुनी जाने वाली महिलाओं को प्रशिक्षण देती है। यह संस्था आर्थिक सशक्तिकरण के लिए स्वयं सहायता समूहों का आयोजन करती हैं तथा प्रताड़ित महिलाओं को निःशुल्क कानूनी सहायता एवं परामर्श प्रदान करती है।
राष्ट्र के विकास में उनके योगदान को मान्यता देते हुए मैसूर विश्वविद्यालय ने श्रीमती आल्वा को साहित्य में डाक्टरेट की मानद डिग्री से सम्मानित किया है। सार्वजनिक जीवन में उनकी उपलब्धियों को सराहते हुए उन्हें राजीव गांधी एक्सलेंस अवार्ड द्वारा अलंकृत किया गया। अपने भारत भ्रमण के दौरान दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति थाबो म्बेकी ने भी उन्हें अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस को स्वतंन्त्रता के लिए संघर्ष के दौरान दिये गए समर्थन के लिए सम्मानित किया है। अन्तर्राष्ट्रीय अल्पसंखयक अधिकारिता फाउन्डेशन द्वारा प्रथम नेल्सन मण्डेला अल्पसंखयक अधिकारिता अवार्ड से न्यूयार्क में सम्मानित किया गया। सीनेटर हिलेरी क्लिंटन के नेतृत्व में मार्च 2007 में केनेडी सेण्टर वाशिंगटन डी0सी0 में वाइटल वाइसेस ग्लोबल पार्टनरसिप द्वारा (Vital Voices Global Partnership) ग्लोबल लीडरशिप अवार्ड (Global Leadership Award) से विभूषित किया गया।
कांग्रेस अध्यक्ष के कार्यालय में दो वर्ष तक संयोजक के रूप में कार्य किया तथा 2004-2009 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की जनरल सेकेटरी रहीं। इससे पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महिला शाखा की राष्ट्रीय संयोजक रहीं।
वह ब्यूरो आफ पार्लियामेण्टरी स्टडीज एण्ड ट्रेनिंग, लोक सभा सचिवालय की परामर्शदात्री भी रहीं। श्रीमती आल्वा को पांच वर्ष की अवधि के लिए उत्तराखण्ड की राज्यपाल नियुक्त किया और उन्होंने 6 अगस्त 2009 को इस पद की शपथ ग्रहण की।
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